भिटौरा पुल के मलबे से गंगा की जलधारा प्रभावित, ‘नमामि गंगे’ ने एडीएम को सौंपा ज्ञापन
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रिपोर्ट शाहनूर आलम जिला सहायक ब्यूरो प्रमुख फतेहपुर
​फतेहपुर। भिटौरा में सेतु निगम द्वारा बनाए जा रहे निर्माणाधीन पुल का मलबा गंगा नदी के लिए मुसीबत बन गया है। निर्माण कार्य पूरा होने के बाद भी मौके पर छोड़ी गई निष्प्रयोज्य सामग्री के कारण गंगा की जलधारा प्रभावित हो रही है और जल क्षेत्र में अतिक्रमण की गंभीर स्थिति पैदा हो गई है। इस समस्या को लेकर ‘नमामि गंगे’ के पदाधिकारियों ने जिलाधिकारी को संबोधित एक ज्ञापन अपर जिलाधिकारी (एडीएम) विनय पांडे को सौंपकर त्वरित कार्रवाई की मांग की है।
​नमामि गंगे के जिला संयोजक शैलेंद्र शरन ‘सिंपल’ के नेतृत्व में कलेक्ट्रेट पहुंचे प्रतिनिधिमंडल ने एडीएम को बताया कि पुल निर्माण के दौरान जलप्रवाह को रोकने के लिए सीमेंट और बालू से भरी हजारों बोरियों का इस्तेमाल किया गया था। काम खत्म होने के बाद भी इस मलबे को हटाया नहीं गया, जिससे गंगा जी का स्वाभाविक प्रवाह बुरी तरह बाधित हो रहा है।
​संगठन द्वारा उठाए गए मुख्य बिंदु:
​जलधारा में भटकाव: खुशरूपुर और हाजीपुर गंगा घाट के आस-पास भारी मात्रा में बालू जमा हो गई है। इसके चलते गंगा की मुख्य जलधारा अपने निश्चित स्थान से काफी दूर चली गई है।
​आवागमन में भारी असुविधा: नदी और पुल के आस-पास बिखरे मलबे व कबाड़ के कारण स्थानीय नागरिकों, श्रद्धालुओं और राहगीरों को निकलने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
​नमामि गंगे के पदाधिकारियों ने जनहित और पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए इस मलबे को तत्काल साफ कराने और भिटौरा पुल को शीघ्र चालू कराने की मांग की है। इस मौके पर प्रतिनिधिमंडल में वेद प्रकाश गुप्ता, विनोद कुमार गुप्ता, अरुण जायसवाल (एडवोकेट), आदित्य श्रीवास्तव और शादाब सहित कई प्रमुख लोग मौजूद रहे।

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