रामपुर।
इंडियन फार्मासिस्ट एसोसिएशन (आईपीए) फार्मासिस्ट वॉइस ने केंद्र सरकार द्वारा कफ सिरप एवं अन्य सामान्य ओटीसी (OTC) दवाओं को ‘शेड्यूल एच’ में शामिल किए जाने के प्रस्ताव पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए पुनर्विचार की मांग की है। इस संबंध में संगठन की ओर से स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री, भारत सरकार को जिलाधिकारी रामपुर के माध्यम से ज्ञापन भेजा गया।
ज्ञापन में संगठन ने कहा कि नशीली दवाओं के दुरुपयोग को रोकने के लिए सरकार के प्रयासों का वह पूर्ण समर्थन करता है, लेकिन संपूर्ण कफ सिरप श्रेणी को शेड्यूल एच के अंतर्गत लाना व्यावहारिक रूप से उचित नहीं होगा। इससे आम जनता, विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को अनावश्यक परेशानियों का सामना करना पड़ेगा।


संगठन के अनुसार सर्दी, खांसी और गले की खराश जैसी सामान्य समस्याओं के उपचार के लिए मरीजों को हर बार चिकित्सकीय पर्ची लेना अनिवार्य हो जाएगा, जिससे आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। ग्रामीण क्षेत्रों में चिकित्सकों की सीमित उपलब्धता के कारण लोगों को समय पर राहत मिलने में भी कठिनाई होगी।
ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया कि शेड्यूल एच दवाओं के लिए विस्तृत रिकॉर्ड, स्टॉक रजिस्टर एवं अन्य अनुपालन प्रक्रियाएं आवश्यक होती हैं, जिससे देशभर के लाखों छोटे एवं मध्यम स्तर के मेडिकल स्टोर संचालकों को व्यापारिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है।


आईपीए ने सुझाव दिया कि दुरुपयोग की समस्या केवल कुछ विशेष सॉल्ट्स, जैसे कोडीन एवं डेक्स्ट्रोमेथॉर्फन युक्त सिरपों तक सीमित है। इसलिए केवल ऐसे विशिष्ट फॉर्मूलेशन को ही शेड्यूल एच के दायरे में लाया जाए, न कि संपूर्ण कफ सिरप श्रेणी को।
संगठन ने सरकार से जनहित, ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं और व्यापारिक व्यावहारिकताओं को ध्यान में रखते हुए प्रस्ताव पर पुनर्विचार करने की अपील की है। ज्ञापन पर आईपीए फार्मासिस्ट वॉइस के जिला अध्यक्ष जमशेद पाशा तथा राष्ट्रीय संगठन मंत्री जुनेद पाशा के हस्ताक्षर हैं।

1 view

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *